Treatment Of Diabetic Retinopathy In Hindi

इसके अंतर्गत कई विधियों का इस्तेमाल किया जाता है।

लेजर फोटो कोएगुलेशन: इस विधि में लेजर की किरणों द्वारा आंख की नसों से रक्तस्राव को रोकने और असामान्य नसों को विकसित होने से रोकने के लिए रक्तवाहिनियों को सील कर दिया जाता है। लेजर उपचार द्वारा रक्तस्राव को रोक दिया जाता है, जिससे दृष्टि में सुधार या स्थिरता आती है। लेजर उपचार की आवश्यकता बीमारी की गंभीरता पर निर्भर करती है । 

इंजेक्शन

आजकल कुछ दवाओं का आंख में इंजेक्शंस लगाया जाता है, जो डाइबिटिक रेटिनोपैथी में होने वाले परिवर्तनों को रोकने में सहायक हैं । इन इंजेक्शनों की जरूरत उन स्थितियों में होती है, जहां पर मैक्युला में सूजन ज्यादा होती है या फिर जहां लेजर उपचार के बाद भी रक्तस्राव होता है ।

 

ऑपरेशन

यदि रक्त भरने से पारदर्शी विट्रीअॅस जेली धुंधली हो जाती है या ट्रैक्शनल रेटिनल डिटेचमेंट हो जाता है, तो लेजर उपचार काम नहीं करता। ऐसी स्थिति में विट्रेक्टॅमी नामक ऑपरेशन की आवश्यकता होती है ।

Alternative Treatment For Diabetic Retinopathy In Hindi (मधुमेह संबंधी रेटिनोपैथी के उपचार के लिए वैकल्पिक चिकित्सा)

निम्नलिखित वैकल्पिक चिकित्सा और उपचार मधुमेह संबंधी रेटिनोपैथी के इलाज या प्रबंधन में मदद करने के लिए जाने जाते हैं——

Tips to Prevent Diabetic Retinopathy In Hindi (सुरक्षा के उपाय) :

  • समय-समय पर आंखों की जांच करायें, यह जांच बच्चों  में भी आवश्यक है | 
  • रक्त में कालेस्ट्राल और शुगर की मात्रा को नियंत्रित रखें।अगर आपको आखों में दर्द, अंधेरा छाने जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सक से मिलें।
  • डायबिटीज़ के मरीज़ को साल में कम से कम एक बार अपनी आंखों की जांच करानी चाहिए।
  • डायबिटीज़ होने के दस साल बाद हर तीन महीने पर आंखों की जांच करायें।
  • गर्भवति महिला अगर डायबिटिक है तो इस विषय में चिकित्सीक से बात करे।
  • डायबिटीज़ जितने लम्बे समय तक रहता है, डायबिटिक रेटिनोपैथी की सम्भातवना भी उतनी ही बढ़ जाती है। हालांकि लेज़र तकनीक से इलाज के बाद अंधेपन की संभावना 60 प्रतिशत तक कम हो जाती है। लेकिन आपका जागरूक रहना और सावधानी के उपाय अपनाना आवश्यमक है।
  • यह आवश्यक है कि डाइबिटिक रेटिनोपैथी का पता लगने के बाद डाइबिटीज को प्रभावी तरीके से नियंत्रित किया जाए।
  • हाई ब्लड प्रेशर और बढ़े हुए कोलेस्टेरॉल को नियंत्रण में रखना आवश्यक है।
  •  लिपिड प्रोफाइल टेस्ट सामान्य रहना चाहिए |
  • अगर गुर्दे से संबंधित बीमारी है, तो उसे डॉक्टर के परामर्श से नियंत्रण में रखना चाहिए।

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