How To Improve Eye Sight In Hindi

आंखें अनमोल हैं, आँखें शरीर का सबसे ज़रूरी और खूबसूरत हिस्सा होती हैं जो कई बार आपकी पहचान भी बन जाती हैं। आँखों की देखभाल अत्यंत आवश्यक होती है। अगर ठीक से देखभाल न मिले तो इनकी रोशनी कम हो सकती है।

नजर कमजोर होना तथा छोटी उम्र में ही चश्मा लग जाना आजकल सामान्य होता जा रहा है। इस समस्या से जूझ रहे लोग इसे मजबूरी मानकर हमेशा के लिए अपना लेते हैं।

दरअसल आंखों की रोशनी कमजोर होने का प्रमुख कारण —

आंखों की ठीक से देखभाल न करना, पोषक तत्वों की कमी या अनुवांशिक कारण होते हैं।

आयुर्वेद हजारों वर्षों से चली आ रही चिकित्सा पद्धति है, जिसकी मदद से इन की रक्षा की जा सकती है। 

ayurvedic treatment for obesity

आयुर्वेद के अनुसार पित्त दोष  हमारी आंखों को नियंत्रित करता है। विशेष रूप से, उप दोष “आलोचक पित्त” आंखों में रहता है। आलोचक पित्त छवियों और रंग को अवशोषित करता है और आस-पास के दृश्‍यों की छाप लेने में मदद करता है। जब आलोचक पित्त संतुलन में रहता है तो आंखें चमकदार, स्वस्थ, उज्ज्वल, स्पष्ट व तेज दृष्टि वाली बनी रहती हैं। लेकिन जब यह पित्त असंतुलित हो  जाता है तो इसका आंखों पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है तथा आंखों की रोशनी कमजोर होने लगती है |

 आँखों की रोशनी में प्राकृतिक रूप से वृद्धि करने के लिये आयुर्वेद में कुछ उपाय बताये गए हैं। 

  • पैर के तलवों पर सरसों के तेल की मालिश करके सोएं
  • एक चने के दाने जितनी फिटकरी को सेंककर सौ ग्राम गुलाबजल में डालकर रख लें. रोजाना रात को सोते समय इस गुलाबजल की चार-पांच बूंद आंखों में डाले. साथ ही, पैर के तलवों पर घी की मालिश करें इससे चश्मे का नंबर कम होना शुरू हो जाएगा |
improve eyesight in hindi
  • आंवले के पानी से आंखें धोने से या गुलाबजल डालने से आंखें स्वस्थ रहती हैं.
  • बादाम की गिरी, बड़ी सौंफ व मिश्री तीनों को समान मात्रा में मिला लें | रोज इस मिश्रण को एक चम्मच मात्रा मेंएक गिलास दूध के साथ रात को सोते समय लें|
  • आंखों के हर प्रकार के रोग जैसे पानी गिरना, आंखें आना, आंखों की दुर्बलता, आदि होने पर रात को आठ बादाम भिगोकर सुबह पीस कर पानी में मिलाकर पीने से आंखें स्वस्थ रहती हैं|
  • हल्दी की गांठ को तुवर की दाल में उबालकर, छाया में सुखाकर, पानी में घिसकर सूर्यास्त से पूर्व दिन में दो बार आंख में काजल की तरह लगाने से आंखों की लालिमा दूर होती है.
  • सुबह के समय उठकर बिना कुल्ला किए मुंह की लार अपनी आंखों में काजल की तरह लगातार 6 महीने लगाते रहने पर चश्मे का नंबर कम हो जाता है|
  • कनपटी पर गाय के घी कीहल्के हाथ से रोजाना कुछ देर मसाज करने पर आंखों की रोशनी बढ़ती है.
  • त्रिफला चूर्ण को रात्रि में पानी में भिगोकर, सुबह छानकर उस पानी से आंखें धोने से नेत्रज्योति बढ़ती है |

Eye-Exercises (नेत्र रोग ओर दृष्टि के लिए आँखों के व्यायाम )

पलकों को गर्म करें (Warming of eyelids)

आँखों के रोग के लिए अपनी हथेलियों को रगड़ कर गर्म करें और फिर उन्हें दोनों आँखों की पलकों पर रखें 5 सेकंड के लिए फिर हटा ले, इस प्रक्रिया को 3 बार दोहरायें।

नेत्र रोग के लिए झपकी (Naps)

आँखो की कमजोरी, किसी जरुरी काम से फुर्सत होने के बाद कुर्सी पर बैठकर सर पीछे टिकाएं और 3 मिनिट आँखे बंद करके झपकी लें। यह आँखों को तरोताजा करती है।

पलकें झपकाना (Blinking)

  1. अपनी आँखों को खोले रखें और आराम से बैठ जाएँ।
  2. तीव्र गति से अपनी आँखों को दस बार झपकाएं।
  3. 20 सेकेंड्स तक अपनी आँखे बंद कर विश्राम करें। धीरे से अपना ध्यान सांसो पर ले जाएँ।
  4. 5 बार यह व्यायाम दोहराएँ।

बगल की ओर देखना (Sideways viewing)

अपने पैरों को शरीर के सीध में रखते हुए बैठ जाएँ।

मुट्ठी बंद और अंगूठा ऊपर रखते हुए अपने हाथों को उठाएं।अपनी आँखों की समानांतर ऊँचाई पर स्थित बिंदु को ध्यान से देखें।

अपने सिर को इस स्थिति में स्थिर रखें तथा अपनी दृष्टि को निम्नलिखित अनुदेशों के अनुसार स्थानांतरित करें।

  1. भौंहों के बीच में रिक्त स्थान पर
  2. बाएं अंगूठे की ओर
  3. पुनः भौंहों के बीच में रिक्त स्थान पर
  4. दायें अंगूठे की ओर
  5. पुनः भौंहों के बीच में रिक्त स्थान पर
  6. बाएं अंगूठे की ओर

इस व्यायाम को 10 से 20 बार दोहराएँ।

इस व्यायाम को समाप्त करने के पश्चात अपनी ऑंखें बंद कर लें और विश्राम करें।

सामने और किनारे की तरफ देखना  (Front and sideways viewing)

  1. अपने पैरों को शरीर के सीध में रखते हुए बैठ जाएँ।
  2. बाएं हाथ से मुट्ठी बांधें किन्तु अंगूठा ऊपर की ओर निकला रहे फिर उसे बाएं घुटने पर रख लें।
  3. अपनी आँखों की समानांतर ऊँचाई पर स्थित बिंदु को ध्यान से देखें।
  4. अपने सिर को इस स्थिति में स्थिर रखें।
  5. अपनी दृष्टि को बाएं अंगुठे पर केन्द्रित रखें और साँस को बाहर छोड़ें।
  6. अपनी आँखों की समानांतर ऊँचाई पर स्थित बिंदु पर ध्यान केन्द्रित करते हुए साँस लें।
  7. यही प्रक्रिया दाएँ अंगूठे के साथ दोहराएँ।
  8. अब अपनी ऑंखें बंद कर लें और विश्राम करें।

घूर्णाकार दृष्टी से देखना (Rotational viewing)

  1. अपने पैरों को शरीर के सीध में रखते हुए बैठ जाएँ।
  2. दाएँ हाथ से मुट्ठी बांधें किन्तु अंगूठा ऊपर की ओर निकला रहे फिर उसे दाएँ घुटने पर रख लें।कोहनियाँ सीधी रखें।
  3. अपने सिर स्थिर रखें और अपनी दृष्टि अंगूठे पर केन्द्रित करें।
  4. कोहनियों को सीधा रखते हुए अपने अंगुठे से एक गोलाकृति बनाएं और अपनी दृष्टि को अंगूठे के साथ में घुमाएँ।
  5. इस व्यायाम को 5 बार दक्षिणावर्त (घड़ी चालन की सुई की दिशा में) तथा 5 बार वामावर्त (घड़ी चालन की सुई की विपरीत दिशा में) दोहराएँ।
  6. इस व्यायाम को बाएं अंगूठे से दोहराएँ।
  7. अब अपनी ऑंखें बंद कर लें और विश्राम करें।

ऊपर तथा नीचे की ओर देखना (Up and down viewing)

  1. अपने पैरों को शरीर के सीध में रखते हुए बैठ जाएँ।
  2. दोनों हाथों की मुट्ठियों (जिनमे अंगूठे ऊपर की ओर निकले हों) को अपने घुटनों पर रखें।
  3. हाथ सीधे रखते हुए अपने दाएँ अंगूठे को धीरे धीरे ऊपर उठाएं और इस गति पर अपनी दृष्टि केन्द्रित रखें।
  4. जब अंगूठा अपनी महत्तम ऊँचाई पर पहुँच जाए तब धीरे धीरे नीचे लाते हुए उसे अपनी प्रारंभिक अवस्था में ले आएं।इस पूरी प्रक्रिया में सिर को स्थिर रखते हुए अपनी दृष्टि को अंगूठे पर लगातार केन्द्रित रखें।
  5. यह प्रक्रिया बाएं अंगूठे के साथ दोहराएँ।
  6. यह आसन का दोनों अंगूठो से 5 बार अभ्यास करें।
  7. पूरे आसन के दौरान अपने सिर व रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें।
  8. अब अपनी ऑंखें बंद कर लें और विश्राम करें।

अंगूठे के अग्र भाग को देखना ( Thumb Viewing)

  1. पैरों को एक दूसरे के ऊपर रख कर बैठ जाएँ।
  2. अपने दाएँ हाथ को नासिका के सामने से सीधा ऊपर उठाएं।
  3. अपने दाएँ हाथ से मुट्ठी बांधे और अंगूठे को ऊपर की ओर रखें।
  4. दोनों आँखों की दृष्टि को अंगूठे के अग्र भाग पर केन्द्रित रखें।
  5. अब अपने हाथ को मोड़ें और धीरे धीरे अंगूठे को नासिका के अग्र भाग पर ले आएं। इस पूरी प्रक्रिया के समय अपनी दृष्टि को अंगूठे के अग्र भाग पर केन्द्रित रखें।
  6. इस स्थिति में, जब आपका अंगूठा नासिका के अग्र भाग पर तथा दृष्टि केन्द्रित है, कुछ समय के लिए बने रहें।
  7. धीरे धीरे अपने हाथ को सीधा करें और दृष्टि को अंगूठे के अग्र भाग पर ही केन्द्रित रखें।
  8. यह आसन का एक पूर्ण चक्र है।
  9. इसी प्रकार 5 चक्रों को पूर्ण करें।

पास और दूर देखना (Near and distant viewing)

  1. एक खुली खिड़की के पास बैठ जाएँ या खड़े रहें, जहां से क्षितिज स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा हो। अपने हाथों को किनारे की ओर रखें।
  2. नासिका के अग्र भाग पर 5 से 10 सेकंड्स तक अपनी दृष्टि केन्द्रित रखें।
  3. अब दूर क्षितिज पर कुछ देर तक दृष्टि केन्द्रित करें।
  4. यह प्रक्रिया 10 से 20 बार दोहराएँ।
  5. अब अपनी ऑंखें बंद कर लें और विश्राम करें।

योग आसन आँखों की मांशपेशियों से सम्बंधित विभिन्न विकार जैसे निकट दृष्टिदोष व दूर दृष्टिदोष को दूर करता हैं।

इन योग आसनों का कुछ महीनों तक नियमित अभ्यास करने से आँखों की कार्यप्रणाली अधिकतम रूप से सामान्य हो जाती है।

योग अभ्यास शरीर व् मन को अनेको स्वास्थ्यप्रद लाभ देता हैं

Leave a Comment