Diabetic Retinopathy in Hindi

Diabetic Retinopathy

डायबिटिक रेटिनोपैथी एक बीमारी है, जो मधुमेह (diabeties) से पीड़ित व्यक्ति की रेटिना (आँख का पर्दा जहां तस्वीर बनती है) को प्रभावित करती है। यह रेटिना को रक्त पहुंचाने वाली महीन नलिकाओं के क्षतिग्रस्त होने के कारण होता है |

ये रक्त वाहिकाएं ही रेटिना को पोषण पहुंचाती हैं। क्षतिग्रस्त होने पर इनमें से रक्त व अन्य तरल पदार्थो का रिसाव होने लगता है, जिससे रेटिना के ऊतकों में सूजन आ जाती है और नजर धुंधलाने लगती है। यह स्थिति आमतौर पर दोनों आंखों को प्रभावित करती है। जैसे जैसे बीमारी बढ़ती है, रेटिना क्षेत्र में वांछनीय रक्त नलिकाएं पनपने लगती हैं जो ऑक्सीजन आपूर्ति में बाधा पैदा करतीं हैं। यह रक्त नलिकाएं मधुमेह के कारण कभी भी फट सकती हैं, फलस्वरूप रेटिना के आसपास होने वाले रक्त स्राव से आँखों में अंध बिंदु (ब्लाइंड स्पॉट) बन सकता है या अचानक दृष्टि खो भी सकती है या नजर कमजोर हो सकती है।

 अगर इसका समय पर इलाज़ न कराया जाए तो पीड़ित व्यक्ति अंधेपन का शिकार हो सकता है। डायबिटिक रेटिनोपैथी दुनिया में अंधेपन का सबसे बड़ा कारण है, जिसके मामले हर साल बढ़ते जा रहे हैं।

Human Eye (मानव आँख)

मानव की आँख तीन परतों में होती हैं——

  1. सबसे बाहरी परत को श्वेतपटल(स्कलेरा) कहा जाता हैं । (The outer layer called the fibrous tunic, which consists of the sclera and the cornea)

 2. आंख की बीच की परत को यूविया कहा जाता है| ( The middle layer responsible for nourishment, called the vascular tunic, also known as  “uvea”,which consists of the iris, ciliary body and the choroid)

3. अंतरतम परत को रेटिना कहा जाता हैं। (The inner layer of photoreceptors and neurons called the nervous tunic, which consists of the retina. )

रेटिना, आँख की प्रकाश – संवेदनशील झिल्ली हैं। जब प्रकाश आंख में प्रवेश करता हैं, तब कॉर्निया और लेंस प्रकाश को रेटिना की तरफ केंद्रित कर देते हैं। रेटिना का मध्य क्षेत्र, मैक्युला कहा जाता हैं, यह लाखों तंत्रिकाओं के अंतिम छोर का एक घनिष्ट पुलिन्दा/समूह हैं, जो कि दृश्य छवि के तीखेपन के लिए जिम्मेदार हैं। रेटिना, छवि को ईलैक्ट्रीकल ईमप्लस/विद्युतीय तंरगों में परिवर्तित करके, ऑपटिक नर्वस/ दृष्टि की तंत्रिकाओं द्वारा मस्तिष्क तक ले जाता हैं। इसलिए  रेटिना के बिना, आंख मस्तिष्क के साथ संवाद नहीं कर सकती और दृष्टि खो जाती हैं ।

औसतन, मधुमेह रोगियों में रेटिनोपैथी की शुरुआत होने में 10-20 साल लग जाते हैं। मधुमेह रेटिनोपैथी के कारण रेटिना परिवर्तन शुरू में लक्षण हीन हो सकता हैं ।

Types of Retinopathy in Hindi

रेटिना की परीक्षा के आधार पर मधुमेह रेटिनोपैथी को दो चरणों में विभाजित किया जा सकता हैं ।

चरण इस प्रकार हैं—–

  1. ना फैलने वाली /नॉन प्रौलिफरेटिव मधुमेह रेटिनोपैथी  (बैकग्राउंड डाइबिटिक रेटिनोपैथी)

  2. फैलने वाली / प्रौलिफरेटिव डायबिटिक रेटिनोपैथी (पी डी आर)
  1.  ना फैलने वाली /नॉन प्रौलिफरेटिव मधुमेह रेटिनोपैथी  (बैकग्राउंड डाइबिटिक रेटिनोपैथी)—

 बैकग्राउंड डाइबिटिक रेटिनोपैथी में आंख के पर्दे के अंदर रक्तवाहिनियां फूलने लगती हैं और उनसे रक्त या तरल पदार्थ का रिसाव होने लगता है। इससे पर्दे के टिश्यूज में सूजन आ जाती है और इसमें पीले रंग का पदार्थ (वसा) जमा होने लगता है, जिसे एक्सयूडेट्स कहते हैं। यदि रिसाव होने पर तरल पदार्थ  मैक्युला (पर्दे के केंद्र) पर होता है तो यह महीन या सूक्ष्म दृष्टि पर असर डालता है और गंभीर बीमारी का रूप धारण कर लेता है । ये क्षतिग्रस्त क्षेत्र, रेटिना के पोषण के लिए, नई रक्त वाहिकाओं को विकसित करने के लिए शरीर को संकेत देते हैं। 

2. फैलने वाली / प्रौलिफरेटिव डायबिटिक रेटिनोपैथी (पी डी आर)—

प्रोलिफरेटिव डाइबिटिक रेटिनोपैथी में असामान्य नई रक्त वाहिनियां पर्दे पर ऑप्टिक नर्व (दृष्टि तंत्रिका) या विट्रीअॅस (पर्दे के आगे के रिक्त स्थान) में फैलने लगती हैं।

ये नई रक्त वाहिकाऎ असामान्य और नाजुक होती हैं;  और कभी यदि यह नसों का जाल जब फटता है, तब इनसे रक्त निकलने लगता है जो विट्रीअॅस जेली में भर जाता है। इस कारण रोशनी आंख के पर्दे तक नहीं पहुंच पाती। कभी-कभी यह विट्रीअॅस जेली में खिंचाव पैदा कर देती है, जिससे पर्दा पीछे से उखड़ जाता है या अपने स्थान से हट जाता है। इस स्थिति को टै्रक्शनल रेटिनल डिटेचमेंट कहते हैं। यह स्थिति दृष्टि को तो हानि पहुंचाती ही है, पूर्ण अंधापन भी ला सकती है। कभी-कभी तो इसके साथ काला मोतिया (ग्लूकोमा) की समस्या भी पैदा हो जाती है।

Symptoms Of Diabetic Retinopathy In Hindi ( रेटीनोपैथी के लक्षण ) ----

  • चश्मे का नम्बकर बार-बार बदलना |
  • आंखों का बार-बार संक्रमित होना|   
  • सुबह उठने के बाद कम दिखाई देना |
  • धब्बे या अंधेरे तार आपकी दृष्टि में तैरते हैं |
  • अस्थिर दृष्टि |
  • आपकी दृष्टि में अंधेरे या खाली क्षेत्र |
  • बिगड़ा रंग दृष्टि |
  • अचानक मकड़ी के जाल या मच्छर जैसी आकृतियां दिखायी देने लगती हैं।
  • मोतियाबिंद किसी भी प्रकार का सफ़ेद या काला |
  • रेटिना से खून आना  |
  • सरदर्द रहना या एकाएक आंखों की रोशनी कम हो जाना |
  • यदि रक्तस्राव की मात्रा अधिक होती है, तो पूर्ण अंधापन हो सकता है।

                           

                                   सामान्य व्याक्ति की तुलना में डायबिटीज़ के मरीज़ों में मोतियाबिंद होने की अधिक संभावना रहती है।

रेटिनोपैथी को बढानें वाले कारक----

निम्नलिखित कारकों में मधुमेह संबंधी रेटिनोपैथी की संभावना बढ़ सकती है:

  • उच्च रक्त चाप  |
  • तंबाकू इस्तेमाल |
  • गर्भावस्था |
  • आपके रक्त शर्करा के स्तर पर खराब नियंत्रण |
  • काला, हिस्पैनिक या देशी अमेरिकी होने के नाते |
  • उच्च कोलेस्ट्रॉल |
  • जितना अधिक आप को मधुमेह है |

Investigations Of Diabetic Retinopathy in hindi ( जांचें )

प्रत्येक मधुमेह रोगी को अपना नेत्र परीक्षण अवश्य करवाना चाहिए जिसमें प्रमुख रूप से —-

  1. पतली आंख परीक्षा: पुतली को फैलाकर पर्दे की जांच अति आवश्यक है,क्योंकि यदि रक्तस्राव होने से पहले ही इसका पता लग जाए, तो बचाव संभव है।

2.इस रोग के लिए रेटिना का रंगीन फोटो लेना चाहिये |

3. फ्लोरेसिन एंजियोग्राफी नामक जांचें करानी चाहिये |

4.ऑप्टिकल कोहीरेंस टोमोग्राफी (ओसीटी): यह अत्याधुनिक जांच है जिसके द्वारा पर्दे की भीतरी पर्तों की जांच संभव है।

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