Constipation in Hindi

अमूमन 60 प्रतिशत लोगों के दिन की शुरुआत constipation  से  होती है।

दुनिया में तरह तरह के लोग देखने को मिलते हैं जो ऊपर से तो बहुत फ्रेश और चमकते हुए नजर हैं पर उनके शरीर के अन्दर का हाल बस उन्हें ही पता होता है। एक पुरानी कहावत है की जिस व्यक्ति का पेट साफ़ हो और जिस पर कोई कर्ज ना हो तो उससे बड़ा सुखी कोई नही। पाउडर, क्रीम, लिपिस्टिक आदि से चेहरे को निखारा जा सकता है पर अन्दर की ताजगी नहीं बनाई जा सकती। शरीर के अन्दर की ताजगी को महसूस कर पाना एक बहुत ही आनंद भरा अनुभव होता है। शरीर के अंदर होने वाली तमाम समस्याओं में एक समस्या है कब्ज जो हमें हमारे शरीर के अंदर की ताजगी का अनुभव करने से रोकती है।

कब्ज यानि कॉन्स्टिपेशन पाचन तंत्र से जुड़ी एक गम्भीर समस्या है जो की किसी भी आयु वर्ग के लोगो को प्रभावित कर सकती है। पर कब्ज रोग की खासियत यह है की इसके मरीज दिनचर्या में सुधार करके और कुछ घरलू उपायों को अपनाकर इसे कंट्रोल कर सकते हैं।

कब्ज़ क्या है ?– What is Constipation?

जब हमारा पाचन पंत्र ख़राब हो जाता है और मल त्याग करते समय कठिनाई होती है या फिर ज़ोर लगाना पड़ता है, उस स्थिति को कब्ज़ कहते हैं।

1.इस अवस्था में मल सख्त व सूखा आता है।

2.कई बार तो मल त्याग करते समय पेट व गुदे में दर्द भी होता है।

वैज्ञानिक तौर पर एक हफ़्ते में तीन बार से कम शौच आने को कब्ज़ माना जाता है।

यह समस्या किसी को भी, किसी भी आयु में हो सकती है। कभी यह कुछ समय के लिए होती है, तो कभी लंबे समय तक चलती है।

 कब्ज़ के कारण गैस, एसिडिटी, बवासीर, गुदाचीर व हर्निया जैसी गंभीर बीमारियां भी हो सकती हैं।

कब्ज़ के लक्षण – Symptoms of Constipation

  • हाजमा खराब होना
  • सिरदर्द होना

  • गैस बनना

  • भूख कम होना

  • आंखों में जलन होना

  • कमज़ोरी महसूस होना

  • जी-मिचलाना

  • शौच के बाद लगना कि पेट साफ नहीं हुआ

  • पेट में भारीपन महसूस होना
  • पेट में मरोड़ पड़ना
  • जीभ का रंग सफ़ेद या मटमैला हो जाना
  • मुंह से बदबू आना
  • कमर दर्द होना
  • मुंह में छाले हो जाना
  • कभी-कभी चक्कर आना
  • एसिडिटी होना
  • डिप्रेशन रहना

कब्ज़ के कारण – Causes of Constipation

कब्ज तब होती है जब कोलन बहुत अधिक पानी को अवशोषित करता है | यह तब हो सकता है जब कोलन की मांसपेशियां धीरे-धीरे संक्रमित हो जाती है, जिससे शरीर में पानी की कमी होती है और पानी की कमी से आँतो में मल सूखने लगता है जिससे मल त्याग में मुश्किल होती है।

मुख्य रूप से कब्ज़ हमारी जीवनशैली और खानपान से जुड़ी है।

  • कम फाइबर युक्त भोजन का सेवन :

जब हमारे शरीर में फाइबर व पानी की मात्रा कम हो जाती है, तो आंत के लिए भोजन को पचान मुश्किल हो जाता है। इसलिए, मल सख्त हो जाता है और कब्ज़ हो जाती है। फाइबर वह चीज़ है, जो भोजन के साथ आंतों में जाकर अपनी जगह बना लेता है। यह भोजन को पचाने में आंतों की मदद करता है।

  • द्रव्य पदार्थों का कम सेवन :

फाइबर को काम करने के लिए द्रव्य पदार्थों की ज़रूरत होती है और यह काम पानी बेहतर तरीके से करता है। जब पानी कम पीते हैं, तो आंतें सूख जाती हैं और कब्ज़ हो जाती है।

  • वक्त-बेवक्त भोजन करने की आदत,
  • तले हुए मैदे के व्यंजन, तेज मिर्च-मसालेदार चटपटे भोजन करना |
CONSTIPATION CAUSES
  • दवाइयों पर निर्भरता :

सबसे आम दवाएं जो कब्ज पैदा होने का कारण है :-

नारकोटिक (Narcotic) दर्दनाशक दवाएं जिनमें कोडेन (codeine), ऑक्सीकोडोन (oxycodone) और हाइड्रोमोरफोन (hydromorphone) शामिल हैं।

एमीड्राप्टीलाइन (amitriptyline) और इपिपीरामिन (imipramine)

एंटीकनवाल्केट्स जिनमें फेनोटोइन (phenytoin) और कार्बामाज़िपिन (carbamazepine)

आइरन और कैल्शिय की टेबलेट

कैल्शियम चैनल ब्लॉकिंग दवाएं जिनमें डिलटिज़ेम (diltiazem) और निफाइडिपिन (nifedipine) शामिल हैं।

Acidity की दवाईया |

  • गर्भावस्था के दौरान : 

अक्सर गर्भवती महिलाओं को इन नौ महीनों के दौरान कब्ज़ हो जाती है। ऐसा प्रोजेस्ट्रोन हार्मोंस का स्राव होने के कारण होता है, जिससे मांसपेशियों में संकुचन होता है और आंतों तक भोजन धीमी गति से पहुंचता है । इसके अलावा, गर्भवती महिलाएं अतिरिक्त आयरन का सेवन करती हैं, जिससे कारण भी कब्ज़ होती है। आमतौर पर यह समस्या गर्भावस्था की पहली तिमाही में ही होती है |

  • हाइपोथायरायडिज्म :

कई बार हॉरमोंस की गडबडी, थाइरॉयड या शुगर की बीमारी होना |

  • पहले का भोजन हजम हुए बिना फिर से भोजन खाना|
  • शारीरिक श्रम की कमी 

अगर कोई भी व्यक्ति शारीरिक रूप से निष्क्रिय होता है तो उसे कब्ज हो सकती है।

ऐसे व्यक्ति जिन्होनें लंबा समय (कई दिनों या हफ्तों के लिए) बिस्तर पर बिताया है तो उनमें कब्ज होने का जोखिम काफी बढ़ जाता है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि शारीरिक गतिविधि हमारे चयापचय को उच्च रखती है, जिससे हमारे शरीर में प्रक्रियाएं अधिक तेजी से होती है।

बड़ों लोगों का युवाओं की तुलना में जीवन अधिक गतिहीन होता है और इसलिए कब्ज का खतरा उनमें अधिक होता है।

व्यायाम बिल्कुल न करना आराम पसंद लाइफ स्टाइल रखना

  • तनाव : 

मानसिक तनाव, चिंता, क्रोध या शोक की अवस्था में भोजन करना कब्ज़ का मुख्य कारण है।

  • मूत्र को रोकना : 

मूत्र को काफ़ी देर तक रोककर रखना सेहत के लिए ठीक नहीं है। इससे न सिर्फ मूत्र मार्ग से संबंधित रोग हो सकता है, बल्कि कब्ज़ की भी समस्या हो सकती है।

  • ज्यादा चाय, कॉफी, तंबाकू, सिगरेट शराब आदि का सेवन करना
  • खाना खाने के तुरंत बाद में फ्रिज का ठंडा पानी पीना
  • रात में देर से खाना, खाना तथा खाते ही बिस्तर पर लेट जाना |
  • बढ़ती उम्र है कॉन्स्टिपेशन की वजह – Constipation Due to Aging

जैसे-जैसे हम बड़े होते हैं, हमारे चयापचय धीमा पड़ जाता है, जिसके परिणामस्वरूप आँतो की गतिविधि कम हो जाती है।

  • सामान्य रुटीन में बदलाव है कब्ज रोग – Change in Routine Causes Constipation

जब हम यात्रा करते हैं, तो हमारे सामान्य रुटीन में परिवर्तन होते हैं। जिसका हमारे पाचन तंत्र पर प्रभाव पड़ता है जिससे कभी-कभी कब्ज उत्पन्न होती है। समय पर भोजन ना करना, समय पर सोना या जागना आदि ये सभी परिवर्तन कब्ज के जोखिम को बढ़ा सकते हैं। 

  • लैक्सेटिव का अधिक इस्तेमाल बढ़ाता है कब्ज का खतरा – Overuse of Laxatives Causing Constipation

लैक्सेटिव का नियमित रूप से उपयोग करने से शरीर इसका आदी बन जाता है जिससे धीरे धीरे खुराक को बढ़ाने की आवश्यकता होती है। लैक्सेटिव पर निर्भर हो जाने के बाद अगर अचानक से बंद कर दें तो कब्ज होने का खतरा बढ़ जाता है।

  • निर्जलीकरण है कब्ज होने का कारण – Constipation Caused by Dehydration

कई सोडा और पेय में कैफीन होता है जो निर्जलीकरण पैदा कर सकते हैं जिससे कब्ज ओर अधिक बिगड़ सकता है। शराब भी शरीर को डिहाइड्रेट करता है इसलिए उन व्यक्तियों को शराब के सेवन से बचना चाहिए जो कब्ज के प्रति अतिसंवेदनशील होते हैं। 

  • बिमारियों के कारण भी होती है कब्ज – Constipation Related Diseases

कोलन, मलाशय या गुदा के माध्यम से मल के कार्यों को धीमा करने वाले रोग कब्ज पैदा कर सकते हैं:

जो लोग इरिटेबल बोवेल सिंड्रोम (आईबीएस) से पीड़ित होते हैं, उनको दूसरों की तुलना में अधिक बार कब्ज होती है।

तंत्रिका संबंधी विकार – एमएस (मल्टीपल स्केलेरोसिस), पार्किंसंस रोग, स्ट्रोक, रीढ़ की हड्डी की चोट

एनडोक्राइन और मेटबॉलिक कंडीशन्स – यूरिमिया, मधुमेह, हाइपरलकसेमिया, खराब ग्लाइसेमिक नियंत्रण, हाइपोथायरायडिज्म

सिस्टेमिक डिसीज – ये ऐसे रोग हैं जो कई अंगों और ऊतकों को प्रभावित करते हैं या पूरे शरीर को प्रभावित करते हैं, इनमें लूपस, स्केलेरोद्मा (scleroderma), अमाइलॉइडिसिस (amyloidosis) शामिल हैं।

  • कैंसर – मुख्य रूप से दर्द वाली दवाओं और कीमोथेरेपी के कारण। 

कब्ज का परीक्षण – Diagnosis of Constipation

  • मेडिकल इतिहास – सख्त कब्ज़ को जांचने के लिए बहुत तरह के निदान उपलब्ध है। पहले डॉक्टर आपकी मेडिकल इतिहास लेंगे और शारीरिक परिक्षण करेंगे जिससे उन्हें यह पता चल सके कि आपको किस तरह की कब्ज़ है।
  • शारीरिक परिक्षण – शारीरिक परिक्षण से उन बिमारियों के बारे में पता चल सकता है जिससे कब्ज़ हुई है।

और कई तरह के परिक्षण उन लोगों के लिए उपलब्ध है जिनका किसी भी तरह के इलाज से कोई भी फर्क नहीं पड़ा। जैसे कि –

  • खून की जांच – जांच थायराइड हार्मोन और कैल्शियम की
  • पेट का  एक्स-रे करना – जितना कठोर कब्ज़ होगा उतना ज़्यादा वह एक्स-रे पर दिखाई देगा।
  • बेरियम एनीमा (Barium enema) – इससे यह पता लगाता है कि आंत्र और मलाशय ठीक तरह से काम कर रहे है या नहीं।
  • डेफिकोग्र्राफी (Defecography) – डेफिकोग्र्राफी बेरियम एनीमा परिक्षण का उपांतरण है।
  • एनोरेक्टल गतिशीलता का अध्ययन (Ano-rectal motility studies) –
  • M.R.I

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