Ayurvedic Medicines for Constipation in Hindi

  • अरोग्यवार्दिनी वटी
  •   नारायण चूरण
  •   इच्छाभेदी रस
  •   परवाल पंचामृत रस
  •   विरेचानी वटी
  •   अभयारिस्ट
  •   कुमारिआसव
  •   चित्रकादी वटी

आयुर्वेदिक रेमेडीज (Ayurvedic Remedies)

1.

  • हरड वकल  
  • छोटी पीपल 
  • काला नमक

सभी 50-50 ग्राम लेकर कूट छान कर रख ले | इसमें से 5 ग्राम रोज रात को गर्म जल के साथ ले |

इस प्रयोग को नियमित 15 दिन करने से पुरानी से पुरानी कब्ज में राहत मिलती है।

2. 

  • सनाये की पत्ती 50 ग्राम
  • सौंफ 100 ग्राम
  • मिश्री 200 ग्राम

सभी को कूट छान कर चूर्ण बनाये  | रात में सोने के समय 5 ग्राम गर्म जल के साथ ले |

इस उपाय को करने से पुरानी कब्ज़ भी ठीक हो जाती है।

3. 

  • काला दाना- 30 ग्राम  
  • सनाय की पत्ती- 30 ग्राम
  • काला नमक- 10 ग्राम
  • सौंफ -20 ग्राम
  • सोंठ- 10 ग्राम

सभी को कूट छान कर चूर्ण बनाये तथा सुबह 5 ग्राम गर्म जल के साथ ले|  

7 दिन लगातार इस उपाय को करने से पुरानी कब्ज़ भी ठीक हो जाती है।

4.  प्रातःकाल निहार मुंह 10 दाने काजू तथा 5 दाने मुनका  खाने से मलावरोध नहीं होता |

5.  प्रातःकाल 100 ग्राम टमाटर का रस पीना भी लाभदायक है | टमाटर का रस आंतो में जमे हुवे मल को काट कर बाहर निकालता है |

6.  बच्चो के पेट पर कैस्टर आयल मलने पर कब्ज दूर होती है |

  • खूब पिएं पानी
    कम पानी पीने से कब्ज़ की समस्या हो सकती है। इस समस्या में मल आंतों में सूख जाता है, और मल त्याग करने के लिए ज़ोर लगाना पड़ता है। कब्ज़ के रोगियों को चाहिए कि वो अधिक से अधिक पानी पिएं। 4 लीटर पानी एक दिन में पीने की आदत डालें।
  • पपीता ,अमरूद खाएं
  • तांबा
    तांबे की बर्तन में पानी भरकर उसमें 1 चम्मच त्रिफला चूर्ण डालकर रातभर रखें। सुबह बिना कुछ खाए पिए इस पानी को छानकर पीना चाहिए। इस प्रयोग को नियमित करने से पुरानी से पुरानी कब्ज में राहत मिलती है।
  • बादाम
    बादाम का तेल भी कब्ज़ की समस्या में लाभ पहुंचाता है। इससे आंतों की कार्य क्षमता बढ़ती है। रात को सोने से पहले गुनगुने दूध में 1 चम्मच बादाम का तेल डालकर पीना चाहिए। 15 दिन लगातार इस उपाय को करने से पुरानी कब्ज़ भी ठीक हो जाती है।
  • नींबू पानी
    एक कप हल्के गरम पानी में 1 नींबू निचोड़कर पीने से आंतों में जमा हुआ मल बाहर निकालने में मदद करता है।
  • गरम दूध
    रात को गरम दूध पीकर सोना चाहिए। अगर मल आंतों में चिपक गया है तो दूध में अरंडी का तेल मिलाकर पिएं।
  • रेशेदार आहार
    रेशेदार भोजन करना चाहिए। हरे पत्तेदार सब्ज़ियों, फलों और सलाद में फाइबर अधिक होता है। कब्ज़ से छुटकारा पाने के लिए पालक का जूस भी लाभदायक है।
  • मुनक्का
    बीज निकले हुए 12 मुन्नके दूध में उबालकर खाएं और दूध पी जाएं। सुबह होने तक आपकी कब्ज़ खुल जाएगी।
  • ऑरेंज
    8-10 दिन तक सुबह ख़ाली पेट संतरे का जूस पीने से पुरानी कॉन्स्टिपेशन  ख़त्म हो जाएगी। लेकिन हां संतरे के जूस में कुछ भी न मिलाएं।
  • ईसबगोल की भूसी
    10 ग्राम ईसबगोल की भूसी 125 ग्राम दही में घोलकर सुबह शाम में खाने से कब्ज़ ख़त्म हो जाता है।
  • व्यायाम
    पेट से संबंधित नियमित व्यायाम करें इससे आपके कब्ज की समस्या के साथ ही पेट और शरीर की अन्य समस्याओं में भी राहत मिलेगी।

कब्ज में क्या खाएं और क्या न खाएं – Diet for Constipation

अगर हमारा खान पान संतुलित रहेगा, तो हमें किसी भी तरह का रोग नहीं हो सकता है। इसलिए, आप जो भी खाएं साफ और स्वच्छ होना चाहिए। यहां हम आपको बताते हैं कि कब्ज न हो उसके लिए किन-किन चीज़ों को अपने भोजन में शामिल करना चाहिए।

इन्हें खाने से होगा लाभ :

  1. फलियां :अन्य सब्जियों के मुकाबले इसमें अत्याधिक मात्रा में फाइबर होता है। इसे आप या तो सूप में डालकर खा सकते हैं या फिर इसकी सलाद भी बना सकते हैं। फलियों की सब्जी भी बनती है।
  2. फल :वैसे तो फल खाना हर तरह से लाभकारी है, लेकिन पपीता, सेब, केला व अंगुर ऐसे फल हैं, जो कब्ज़ को तुरंत ठीक कर देते हैं। इनमें प्रचुर मात्रा में फाइबर होता है, जो पेट को साफ करने में मदद करता है।
  3. सूखे मेवे :किशमिश, अखरोट, अंजीर व बादाम जैसे सूखे मेवों में अधिक फाइबर होता है। नियमित रूप से इनका सेवन करने से कब्ज़ ठीक होने लगती है। इन्हें रात को भिगोकर सुबह खाने से ज़्यादा फायदा होता है।

4. पॉपकॉर्न :पॉपकॉर्न को फाइबर और कैलोरी का स्रोत माना जाता है। पॉपकॉर्न को स्नैक के तौर पर खाने से कब्ज़ से राहत मिलती है। यहां आपके लिए यह जानना भी ज़रूरी है कि बाज़ार में मिलने वाले फ्लेवर पॉपकॉर्न में कोई भी प्राकृतिक गुण नहीं होता, उल्टा ये कब्ज़ का कारण बनते हैं।

5. द्रव्य पदार्थ :अगर आप कब्ज़ से हमेशा के लिए छुटकारा पाना चाहते हैं, तो अधिक से अधिक तरल पदार्थ का सेवन करना चाहिए। दिनभर में कम से कम आठ-दस गिलास पानी तो ज़रूर पीना ही चाहिए। इसके अलावा, विभिन्न तरह के फलों व सब्जियों का जूस पिया जा सकता है। इससे आंतों को भोजन पचाने में दिक्कत नहीं आती और शरीर हमेशा हाइड्रेट रहता है।

इनसे बनाएं दूरी :

  1. तले हुए खाद्य पदार्थ :चिप्स व चाट-पकौड़ी जैसी चीज़ें खाने से पेट का हाजमा खराब हो जाता है और कब्ज़ की शिकायत होती है।
  2. शक्कर युक्त पेय पदार्थ :कोल्ड ड्रिक्स या फिर चीनी से बने शरबत पेट को खराब करते हैं।
  3. चाय-कॉफी :जिन्हें कब्ज़ हो, उन्हें चाय व कॉफी से भी परहेज करना चाहिए।
  4. जंक फूड :पास्ता, बर्गर, पिज्ज़ा या फिर माइक्रोवेव में बने खाद्य पदार्थों से परहेज करना चाहिए।
  5. शराब व धूम्रपान :धूम्रपान करने से हमारा पाचन तंत्र खराब हो जाता है। धूम्रपान का सीधा असर हमारी छोटी व बड़ी आंत पर पड़ता है, जिस कारण कब्ज़ होती है। वहीं शराब पीने से शरीर में पानी की कमी हो जाती है और कब्ज़ का सामना करना पड़ता है।

खाने पीने में क्या सावधानी बरतें, यह जानने के बाद आइए अब पता करते हैं कि कौन-कौन से योग किए जाएं, ताकि यह समस्या जड़ से खत्म हो जाए।

कब्ज़ के लिए योगासन – Yoga for Constipation

कब्ज़ के लिए निम्न योगासन करने चाहिए :-

1. मयूरासन :

जिन्हें कब्ज़ है, उनके लिए मयूरासन से बेहतर कुछ नहीं हो सकता। इससे पाचन क्रिया ठीक होती है और गैस, कब्ज़ व पेट में दर्द जैसी समस्या दूर होती हैं।

 

करने की प्रक्रिया :

  • घुटनों के बल बैठ जाएं और आगे की तरफ झुक जाएं।
  • हथेलियों को एक साथ जमीन पर सटाते हुए दोनों कोहनियों को नाभी पर टिकाएं और संतुलन बनाते हुए घुटनों को सीधा करने की कोशिश करें।
  • इस आसन को एक बार में करना कठिन है, लेकिन नियमित अभ्यास से इसे किया जा सकता है।

सावधानी : जिन्हें उच्च रक्तचाप, टी बी या फिर ह्रदय संबंधी कोई बीमारी हो, उन्हें यह आसन नहीं करना चाहिए।

अर्ध मत्स्येंद्रासन :

इस आसन को करने से भी कब्ज़ में राहत मिलती है।

 

करने की प्रक्रिया :

  • जमीन पर बैठ जाएं और रीढ़ की हड्डी सीधी रखें।
  • अब दाएं पैर को मोड़ते बाएं तरफ ले जाएं और एढ़ी को कुल्हे से स्पर्श करने का प्रयास करें। वहीं, बाएं पैर को घुटने से मोड़कर दाएं पैर के ऊपर से ले जाते हुए तलवे को जमीन से सटा लें।
  • अब दाएं हाथ को जांघ व पेट के बीच में ले जाते हुए बाएं पैर को छूने की कोशिश करें और बाएं हाथ को पीछे की ओर ले जाएं (जैसा फोटो में दर्शाया गया है)।
  • इसके बाद कमर, कंधों व गर्दन को बाईं ओर मोड़ते हुए बाहिने कंधे के ऊपर से देखने की कोशिश करें।
  • इस दौरान, लंबी व गहरी सांस लेते व छोड़ते रहें।
  • अब सांस छोड़ते हुए दाएं हाथ, कमर, गर्दन व छाती को ढीला छोड़ते हुए सामान्य मुद्रा में आ जाएं और दूसरी तरफ से इसी प्रक्रिया को दोहराएं।

सावधानी : गर्भवती महिलाओं और जिन्हें रीढ़ की हड्डी, गर्दन व कमर में दर्द हो या फिर एसिडिटी की परेशानी हो, उन्हें यह आसन नहीं करना चाहिए।

. हलासन :

यह कब्ज़ ठीक करने के साथ-साथ मोटापे को भी कम करता है।

करने की प्रक्रिया :

  • जमीन पर पीठ के बल लेट जाएं और पैरों व हाथों को सीधा रखें।
  • अब शरीर को कमर की तरफ से मोड़ते हुए पैरों को सीधा 90 डिग्री तक उठाने की कोशिश करें।
  • सांस छोड़ते हुए कमर को पूरा मोड़ें और पैरों को पीछे ले जाते हुए अंगुठों को जमीन से स्पर्श करने की कोशिश करें।
  • कुछ सेकंड इसी स्थिति में रहने के बाद सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में आ जाएं।

पवनमुक्तासन :

यह लीवर को मज़बूत कर पाचन तंत्र को ठीक करता है और कब्ज़, गैस व एसिडिटी से राहत देता है।

करने की प्रक्रिया :

  • जमीन पर पीठ के बल लेट जाएं। पहले दाहिनी पैर को घुटने से मोड़ें और दोनों हाथों को आपसे में जोड़ते हुए घुटने को पकड़ लें।
  • अब सांस लेते हुए घुटने को छाती से लगाने की कोशिश करें और फिर सांस छोड़ते हुए गर्दन उठाते हुए नाक को घुटने से लगाने का प्रयास करें।
  • कुछ सेकंड इस स्थिति में रहने के बाद सांस लेते हुए वापस सामान्य मुद्रा में आ जाएं और इस तरह से सांस लें कि पेट पूरा फूल जाए और सांस छोड़ें तो पेट पूरा अंदर चला जाए।
  • यह प्रक्रिया बाएं पैर से और फिर दोनों पैरों के साथ करें।

सावधानी : जिसे कमर या घुटनों में दर्द हो, उन्हें यह आसन नहीं करना चाहिए। साथ ही सुबह खाली पेट या फिर भोजन करने के पांच घंटे बाद इसे करें।

तितली मुद्रा :

पाचन तंत्र को बेहतर करने के लिए यह आसन सबसे उपयुक्त व आसान है।

करने की प्रक्रिया :

  • जमीन पर बैठ जाएं और दोनों घुटनों को मोड़ते हुए तलवों को आपस में मिलाएं।
  • तलवों को दोनों हाथों से पकड़ लें और दोनों घुटनों को आराम-आराम से ऊपर-नीचे करें।
  • कोशिश करें कि जब घुटने नीचे जाएं, तो वह जमीन को स्पर्श करें।

सावधानी : अगर घुटनों में चोट लगी हो या दर्द हो, तो यह आसन न करें।

एक बात का ध्यान रहे कि अगर आपने पहले कभी ये योगासन नहीं किए हैं, तो किसी ट्रेनर की देखरेख में ही करें।

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